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Saturday, March 6, 2010

गुलाब की कलम लगाने की विधि



देसी गुलाब


जब हम गुलाब की बात करते हैं तो अक्सर सुन्दर कलात्मक आकृति व विविध रंग वाले हायब्रिड गुलाब की कल्पना करते हैं, जिसके पौधे पर खिला एकमात्र फूल किसी का भी मन मोह लेता है। हायब्रिड गुलाब में रंगों, आकार व आकृति, रूप आदि सभी में विविधता है। क्रिश्चियन डॉयर, एन्विल स्पार्क, मोंटेजुमा, सी-पर्ल, एफिल-टावर, किस-ऑफ-फायर, मारिया-क्लास, गोल्डन जायंट आदि असंख्य भव्य व  मनोहारी आकृति वाले पुष्प मिलते हैं और इसके आगे आम माना जाने वाला लाल गुलाब, जिसे हम पूजा व हार और सजावट के लिए उपयोग में लाते हैं, कहीं भी नहीं ठहरता। जी हां, मैं बात कर रही हूं देसी गुलाब रोजा दमस्काना व एडवार्ड रोजा के लाल खिले पुष्पों की, जो सुगन्ध से भरपूर होते हैं। गुल+आब अर्थात् ईरान का सुगन्धित पुष्प, जिसे हम देसी गुलाब कहते हैं, आम पाया जाने वाला फूल है। पूजा में, वेणी में, हार में, सजावट में, दूर-दूर तक सुगंध बिखेरता यह देसी कहा जाने वाला गुलाब ही है। देसी गुलाब सुगंध के मामले में सुन्दर से सुन्दर हायब्रिड  गुलाब को पछाड़ देता है। इत्र,  गुलाब  जल, सूखी  पंखुड़ियां व औषधि के लिए देसी गुलाब ही  सर्वोत्तम होता है। दूसरी इसकी  विशेषता, इसकी  दृढ़ प्रकृति  व लगभग  पूरे वर्ष फूल दे सकने की क्षमता  भी है। देसी  गुलाब में  अधिकतर  लाल या फिर गहरे गुलाबी  रंग के  फूल ही होते हैं। एक किस्म में सफेद  फूल  भी खिलते हैं, परन्तु  सुगंध में  लाल गुलाब  ही सवरेत्तम  रहता है। ताजे गुलाब की पंखुड़ियों को धोकर,  कपड़े से पोंछ  कर, छाया  में सुखा  कर कपड़े  की पोटली में भर दें और इसे किसी भी अलमारी में रख दें तो खोलते ही सुगंध आपका स्वागत करेगी। इसी प्रकार लाल गुलाब की पंखुड़ियों को धोकर उनका शर्बत भी बनता है, जो अत्यन्त शीतल गुण वाला होता है। गुलकंद के लिए भी इसी गुलाबी लाल गुलाब को प्रयोग करते हैं।
देसी गुलाब कलम द्वारा तैयार किया जाता है। अक्तूबर माह में इसकी कलम लगाई जाती है। नर्सरी से भी इसके पौधे आसानी से सस्ते में ही मिल जाते हैं। इसकी क्यारी धूप वाले स्थान में ही बनानी चाहिए। सितम्बर के अंत में ही क्यारी को खूब गहरा खोद कर खुला छोड़ दें। इसमें प्रति पौधे के हिसाब से कम से कम पांच किलो गोबर की पुरानी सड़ी खाद मिला कर फिर खुला छोड़ दें। कम से कम दो बार, बेहतर है कि तीन बार क्यारी खोदी जाए। पौध लगाने से पूर्व एक मुट्ठी नीम की खली व बड़ा चम्मच हड्डी का चूरा जमीन में मिला दें और वहां पौधा लगा कर अच्छी तरह दबा दें। क्यारी को भरपूर पानी से भर दें। यदि कोई टहनी कमजोर या रोगग्रस्त हो तो काट दें। एक सप्ताह बाद क्यारी में गुड़ाई कर दें, ताकि जड़ों को हवा मिले। सर्दियों में तीन सप्ताह में एक बार पानी देना पर्याप्त होता है। यदि पुराने पौधे हैं तो पुरानी बीमार, कमजोर टहनियों को तेज धार वाली स्केटियर कैंची से तिरछा काट दें। पौधों को गोलाकार आकार में काटें तो झाड़ी सुन्दर लगेगी।
गुलाब के फूल जब काटें तो टहनी को 45 डिग्री कोण पर तिरछा काटें। टहनी से फूल लेते समय ध्यानपूर्वक ही तोड़ें, क्योंकि अक्सर फूलों की कलियां गुच्छों में आती हैं। जब फूल की बहार समाप्त हो जाए तो टहनियों 
को थोड़ा नीचे से काटें, ताकि टहनी पर नया अंकुरण होकर फूल स्वस्थ व अधिक संख्या में आए। जिस 
टहनी पर फूल समाप्त हो जाए, उसे थोड़ा नीचे से तत्काल काट दें। शीत ऋतु में रात की ओस व दिन की धूप इसे लाभ पहुंचाती है। यदि आप गमले में पौधा लगाती हैं तो हर वर्ष उसे बदल कर नई मिट्टी में अवश्य 
लगायें। तो इस वर्ष अपनी बगिया में देसी गुलाब अवश्य लगाएं।

Wednesday, July 22, 2009

गुलाब की देखभाल कैसे करें

अगर आप बिना ज्यादा मेहनत किए अपने गार्डन को खूबसूरत दिखाना चाहते हैं तो इसके लिए गुलाब का फूल सबसे अच्छा रहेगा। गुलाब के पौधे के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि आप इसे आंगन के साथसाथ घर के अंदर भी रख सकते हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि उन्हें सूरज की पर्याप्त रोशनी मिलती हो। अपने गार्डन में गुलाब के पौधे को लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बशर्ते कि आप कुछ छोटेछोटे टिप्स पर अमल करें। आइए हम आपको गुलाब की गार्डनिंग के लिए कुछ टिप्स देते हैं, जिसकी मदद से आप अपने गार्डन को आकर्षक बना सकते हैं। घर में गुलाब लगाएं तो ध्यान दें

पौधे को लगाना : टिप्स की शुरुआत गुलाब के पौधे को लगाने से ही शुरू होती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे लगाते हैं। अगर आप इसे गमले में लगा रहे हैं तो पौधे को लगाने से पहले मिट्टी में जैविक खाद मिला लें। वहीं अगर जमीन पर गुलाब का पौधा लगा रहे हैं तो दो पौधों के बीच में पर्याप्त दूरी जरूर रखें। पौधों को सिर्फ उसी जगह लगाएं जहां पर उसे सूरज की पर्याप्त रोशनी मिलती हो।

पानी देना : पौधे के अच्छे विकास के लिए जरूरी है कि उसे पर्याप्त मात्रा में पानी दिया जाए। अगर पौधा गमले में लगा है तो बहुत ज्यादा पानी दें। सुबह के समय पौधों को पानी देना सबसे अच्छा रहता है। गर्मी के समय पौधों का विशेष ध्यान रखें और रूटीन के हिसाब से पानी दें।

मल्चिंग : चूंकि गुलाब को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है, इसलिए मल्च का इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और पौधे का अच्छे विकास भी होगा। गुलाब के पौधे की जड़ में दो से चार इंच मोटी बारीक पत्ती या घास की परत बिछा दें। इसे तने से कम से कम एक इंच की दूरी पर रखें।

खाद : जहां तक हो सके रसायनिक खाद से दूर रहें। ऐसे कई घरेलू खाद भी हैं जो गुलाब के विकास में काफी मदद करता है। अंडे का खाल, सब्जियों का अवशेष और टी ग्राउंड काफी फायदेमंद होता है। अगर आप रसायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं तो इस बात को सुनिश्चित करें कि आप इसका इस्तेमाल सही समय पर करते हों। ऐसे खाद का इस्तेमाल करें, जिनमें फास्फोरस हो।

छंटाई : गुलाब के पौधे को लगाने का एकमात्र उद्देश्य होता है अपने गार्डन में खूबसूरत फूलों को देखना। अगर आप ज्यादा से ज्यादा फूल पाना चाहते हैं तो पौधों की नियमित रूप से कटाईछंटाई भी करें। इससे पौधे के विकास को बढ़ावा मिलता है। बाहर की तरफ निकलने वाली कोंपलों को काट दें। साथ ही मरे, टूटे या बीमारी से ग्रस्त हिस्से को भी हटाना भूलें।कटाईछंटाई भी करें। इससे पौधे के विकास को बढ़ावा मिलता है। बाहर की तरफ निकलने वाली कोंपलों को काट दें। साथ ही मरे, टूटे या बीमारी से ग्रस्त हिस्से को भी हटाना भूलें।